सà¤-कदर न पजाब, गाधर आदà¤- राजयो को जीतकर उनह अपन अधीन कर लà¤-या था। वहा यवन सनà¤-को क अतयाचारो स लोग तरासत थ। चारो तरफ आतक वयापत था। बह-बटà¤-यो की असमà¤-ता असरकषà¤-त थी। यवन पर à¤à¤¾à¤°à¤¤ को जीतना चाहत थ। सथà¤-तà¤- बडी दयनीय थी। यवनो क राजय का वà¤-सतार पर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¤µà¤°à¤· म हो, यह चाणकय जस आतमसममानी दशà¤à¤•त क लà¤-ठअसहनीय था। à¤à¤¸ म चाणकय न à¤à¤• à¤à¤¸ बालक को शसतरा-शासतरा की शà¤-कषा दकर यवनो क सामन खडा कà¤-या, जो वà¤-दवान तो था ही, साथ ही राजनीतà¤- और यदध नीतà¤- म à¤à¥€ नà¤-पण था। यही बालक चाणकय क सहयोग स नदवश का नाश करक चदरगपत मौरय क नाम स मगध का शासक बना। उसन यवनो को à¤à¤¾à¤°à¤¤ की सरहद क पार कर à¤à¤¾à¤°à¤¤à¥€à¤¯ सà¤à¤¯à¤¤à¤¾ और ससकतà¤- की रकषा की तथा दश म à¤à¤•ता व अखडता की सथापना की।